दूषित भोजन के सेवन से कामला रोग की उत्पत्ति होती है. होटल में अधिक भोजन करने वाले, बाजार में खुली रखी चीजों का सेवन करने वाले पीलिया रोग से अधिक पीडित होते हैं. वर्षा ऋतु में कुओं और नदियों का पानी अधिक दूषित हो जाता है नगरों मे शुद्ध करके नदियों के जल को वितरित किया जाता है, फिर भी जल मे दूषित तत्त्व व विभिन्न रोगों के जीवाणु मिले रहते हैं. ऐसे जल को पीने से पीलिया की उत्पत्ति होती है.

यकृत (जिगर) की विकृति भी पीलिया रोग की उत्पत्ति करती है. यकृत में निर्मित पित्त जब किसी कारण से रक्त मे मिलने लगता है तो कामला रोग की उत्पत्ति होती है अधिक गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले भी पीलिया यानिकी कामला रोग के शिकार होते हैं.कामला रोग मेँ रोगी का चेहरा और त्वचा का रंग पीला हो जाता है. रोगी को पीले रंग का पसीना आता है उसके वस्त्र भी पीले हो जाते हैं वस्त्रो से दुर्गन्ध आती है. पाचन क्रिया की विकृति से रोगी को कुछ भी नहीं पचता ऐसे में रोगी को अतिसार हो जात्ता है. रोगी का मल भी पीले रंग का आता है. पीलिया रोग मे शरीर में खुजली होती है शारीरिक रूप से रोगी बहुत निर्बल हो जाता है रोगी की नीद नष्ट हो जाती है. शरीर में हर समय बेचैनी अनुभव होती है. मुंह का स्वाद कड़वा ढो जाता है. कामला रोग की उचित चिकित्सा नही होने पर शरीर के बिभिन्न अंगों मेँ सूजन के लक्षण प्रकट होते हैं.

1. 50 ग्राम मूली के पत्तो के रस मे थोडी-सी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कामला की विकृति नष्ट होती है.

2. 250 ग्राम मटठे में 8 काली मिर्च पीसकर मिलाकर सेवन करने से कामला ( पीलिया ) रोग में बहुत लाभ होता है.

3. अनार के पत्तों को छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर रखे. इसमें से 5 ग्राम चूर्ण मटठे के साथ सुबह-शाम सेवन करें.

4. अनन्नास के फूलो के 25 ग्राम रस में हल्दी का चूर्ण 2 ग्राम और मिश्री 5 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कामला मे लाभ होता है.

5. शवेत प्याज का रस 10 ग्राम, हल्दी का चूर्ण 1 ग्राम और 10 ग्राम गुड़ मिलाकर सेवन करने से पीलिया की विकृति में लाभ होता है.

6. नीम के कोमल पत्ते, नीम की छाल, नीम के फूल और नीम की निबोली पकी हुई, सबको 10-10 ग्राम मात्रा मे लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखे. प्रतिदिन 1 ग्राम चूर्ण, घी और मधु मिलाकर सेवन करे.

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7. कासनी के 5 पत्तों का रस निकालकर, काली मिर्च के 2 दाने पीसकर, रस मेँ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पीलिया नष्ट होने लगता है. रोगी को इसके साथ तक्र और चावल खाने चाहिए. कासनी के 30 ग्राम फूलों को 300 ग्राम जल मे उबालकर काड़ा बनाकर पीएं.

8. गिलोय का रस 5 ग्राम सुबह, 5 ग्राम शाम को पिलाने से वक्त की विकृति नष्ट होने से पीलिया में बहुत लाभ होता है.

9. वेल के पत्तों को पीसकर किसी वस्त्र मे बांधकर रस निकाले 5 ग्राम रस मे 3 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीएं.

10. संतरे का रस लगभग 200 ग्राम पीने से कामला जल्दी नष्ट होता है.

11. गन्न का 250 ग्राम रस पीने से कामला का निवारण होता है.

12. अनार का रस 100 ग्राम मात्रा में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से पीलिया में बहुत लाभ होता है.

13. चुकंदर के 100 ग्राम रस में थोड़ा-सा नीबू का रस मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से पीलिया नष्ट होता है.

14. आंवले की ताजी जड़ का रस 15 ग्राम मात्रा को दूध के साथ मिलाकर पीने से पीलिया रोग का प्रकोप नष्ट हो जाता है.

15. भांगरे का रस 10 ग्राम मे 2 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण और 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करे.

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