रक्ताल्पता की विकृति क्यों होती है – 
शरीर में रक्त की कमी अनेक कारणों से हो सकती है. सीढियों से उतरते चढते फिसलकर गिरने से चोट लगने पर अधिक रक्त निकल जाने से रक्ताल्पता हो सकती है. स्त्रियों को ऋतुस्राव की विकृति के कारण, अधिक रक्तरत्राव होने से रक्ताल्पता की विकृति होती है.

अधिक क्रोष्ठबदृद्रता से आंत्रों में मल एकत्र होने से भूख नष्ट हो जाती है ऐसे में शारीरिक निर्बलता बढने से रक्त की कमी होने पर रक्ताल्पता की उत्पत्ति होती. अधिक दिनों तक क्षय रोग, आंत्रिक ज्वर (टायफाइड), अर्श रोग, अतिसार मेँ अधिक रक्तस्राव होने से रक्ताल्पता की विकृति होती है. यकृत विकृति, प्लीहा मेँ शोथ होने पर भी शरीर में तेजी से रक्त की कमी होती है. मधुमेह रोगी रक्ताल्पता से पीडित होते हैं.

गर्भावस्था में स्त्रियाँ भी इस रोग से ग्रस्त होती हैं रक्ताल्पता होने पर रोगी की भूख नष्ट हो जाती है. किसी चीज को खाने की इच्छा नही होती शारीरिक निर्बलता के कारण परिश्रम के कार्य करने मे रोगी असमर्थ हो जाता है. बिस्तर से उठकर चलने मे पांव लड़खड़ाने लगते हैं नेत्रों के आगे अंधेरा छाने लगता है रक्ताल्पता के कारण नपुंसक्ता की उत्पत्ति होती है. स्त्रियों की काम इच्छा नष्ट हो जाती है शरीर के कुछ अंगों में शोथ दिखाई देता है.

1. शरीर मे रक्ताल्पता की विकृति के कारण को ज्ञात करके पहले उसे नष्ट करने के लिए चिकित्सा करनी चाहिए भोजन में पौष्टिक खाद्यो की मात्रा बढाकर रक्ताल्पता का निवारण किया जा सकता है.

2. प्रतिदिन सलाद के रूप मे खीरा, ककडी, प्याज, चुकंदर, नीबू का रस, मूली, गाजर का सेवन करने से अरुचि नष्ट होने के साथ अधिक भूख लगती है इन सब्जियों का रस पीने से शारीरिक निर्बलता दूर होती है.

3. एक केले को जल में चूना मिलाकर, लेप करके रख दें प्रात: उठकर उस केले को छीलकर खाने से रक्ताल्पता की विकृति नष्ट होती है.

4. चित्रक की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर रखें 100 ग्राम रस डालकर फिर घोटे इस चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा मे सेवन करने से रक्ताल्पता नष्ट होती है जल के साथ सेवन करें.

1. बार-बार उल्टी होने के मुख्य कारण और निवारण – Click Here

2. पीलिया (Jaundice) का रामबाण घरेलू उपचार – Click Here

3. पेट के दर्द को करेंगे जड़ से खत्म ये घरेलु उपाएँ – Click Here

5. प्रतिदिन 200 ग्राम टमाटर काटकर उसमे सेधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण डालकर खाने से बहुत लाभ होता है. टमाटर का सूप भी अधिक गुणकारी है रक्ताल्पता के रोगी को प्रतिदिन घालक, बथुआ, मेथी आदि की सब्जी इस्तेमाल करनी चाहिए.

6. आंवले या सेब का मुरब्बा खाने और दूध पीने से बहुत लाभ होता है. अगूरों का सुबह-शाम 100 ग्राम मात्रा मे सेवन करने से रक्ताल्पता का निवारण होता है. हृदय की तीव्र धडकन सामान्य होती है.

7. बेल के ताजे पत्तो का रस 5 ग्राम में थोड़ा-सा काली मिर्च का चूर्ण डालकर पीने से पाचन क्रिया प्रबल होने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है.

8. टमाटर का 100 ग्राम रस या कटे हुए 200 प्राम टमाटर मे काला नमक डालकर खाने से बहुत तेजी से रक्त की वृद्धि होकर रक्ताल्पता नष्ट होती है.

9.. गन्ने के 200 ग्राम ताजे रस में, आंवलों का रस 5 ग्राम और मधु 10 ग्राम मिलाकर पीने से रक्ताल्पता में बहुत लाभ होता है.

अगर दोस्तों हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी हो और आगे भी इसी प्रकार की जानकारी पाने के लिए वेल आइकॉन पर क्लिक करके हमे सब्सक्राइब करें.धन्यवाद…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here