हर समय कुछ न कुछ खाते रहने, प्रकृति विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का सेवन करने और बिल्कुल शारीरिक श्रम न करने वाले स्त्री-पुरुष व किशोर अजीर्ण ( एसिडिटी ) रोग से पीडित होते हैं. भोजन करने के बाद उसकी पाचन क्रिया सम्पन्न होने से पहले जो स्त्री-पुरुष व किशोर कुछ खाते-पीते हैं तो पाचन क्रिया विकृति होती है. आमाशय मे पहले ही अधपका भोजन होता है और ऊपर से नया भोजन पहुच जाता है. कुछ दिनो तक ऐसा करने से अजीर्ण ( एसिडिटी ) की उत्पत्ति होती हैं.अधिक घी, तेल से बने मिर्च मसालों व अम्ल रस के खाद्य-पदार्थ अति शीघ्र अजीर्ण ( एसिडिटी ) की उत्पत्ति करते हैं. घी, तेल के खाद्य पदार्थ गरिष्ठ होने के कारण देर से पचते हैं. ऐसे में जल्दी-जल्दी दूसरे खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले जब बिल्कुल शारीरिक श्रम नही करते, दिन में अधिक देर तक सोते हैं तो अजीर्ण रोग से पीडित होते हैं. जल्दी-जल्दी भोजन करने, अनियमित समय पर भोजन करने, मांस-मछली, शराब, तंबाकू चाय-कांफी का अधिक सेवन करने से भी अजीर्ण की विकृति होती है. अजीर्ण ( एसिडिटी ) रोग में रोगी क्रो भूख नही लगती भोजन से उसे अरुचि हो जाती है सभी चीजे बेस्वाद लगने लगती हैं. रोगी को जल्दी-जल्दी खटूटीं डकारे आने लगती हैं. छाती मे तीव्र जलन होने लगती है. अजीर्ण रोगी उदर में आध्यान अर्थात अफारा आने से बहुत पीडित होते हैं. रोगी अधिक घबराहट अनुभव करता है. शारीरिक रूप से रोगी अधिक थकावट अनुभव करता है. रोगी कोई भी शारीरिक श्रम का काम नहीं करना चाहता. यदि कोई शारीरिक श्रम का काम करना चाहता है तो जल्दी ही उसका शरीर पसीने से भीग जाता है. हृदय जोरों से धड़कने लगता है. अधिक क्रोधी स्वभाव के स्वीरुष, चिंता और मानसिक तनाव से ग्रस्त व्यक्ति अजीर्ण ( एसिडिटी ) से पीडित’ होते अजीर्ण के रोगी अनिद्रा (नीद न आना) की विकृति से भी पीडित होते हैं.

इसके घरेलु उपाये –

1. सोंठ और धनिया –

सोंठ और धनिया 25-25 ग्राम लेकर 200 ग्राम जल मे उबालकर काड़ा बनाएं 50 ग्राम शेष रह जाने पर छानकर पीएं.

2. हरड़ का चूर्ण –

हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में मधु किशमिश और मिश्री मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण ( एसिडिटी ) रोग नष्ट होता है.

3. हरड़ और सोठ –

हरड़ सोठ को बराबर मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं इसमे से 3 ग्राम चूर्ण और थोडा-सा गुड़ तर्क के साथ सेवन करो.

4. प्याज –

प्याज को बारीक-बारीक काटकर उसमे नीबू का रस और सेधा नमक मिलाकर खाने से अजीर्ण में बहुत लाभ होता है.

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5. दालचीनी और इलायची –

दालचीनी, इलायची, सोंठ और जीरा चारों वस्तुएं 20-20 ग्राम मिलाकर कूट-पीसकर रखे. इस चूर्ण की तीन ग्राम मात्रा हल्ले गर्म जल से सुबह और शाम लेने से अजीर्ण विकार नष्ट होता है.

6. भुना हुआ जीरा –

200 ग्राम तक्र, भुना हुआ जीरा आधा ग्राम, काली मिर्च के 5 दाने पीसकर मिलाकर स्वाद के अनुसार सेधा नमक डालकर पिएं.

7. सोंठ का चूर्ण –

सोंठ का चूर्ण 3 ग्राम, यवक्षार आधा ग्राम मिलाकर घी के साथ चाटें.

8. हरड़ और पिप्पली –

हरड़, पिप्पली और सोंठ तीनो को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें. सुबह-शाम 3-3 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करो.

9. टमाटर –

दो टमाटर काटकर सेधा नमक और “काली मिर्च का चूर्ण डालकर सुबह-शाम खाने से अजीर्ण ( एसिडिटी ) विकार नष्ट होता है.

10. सोठ, काला नमक और पोदीना –

सोठ, काला नमक और पोदीना सभी 1-1 ग्राम मात्रा में लेकर इसमे चित्रक की मूल 2 ग्राम मिलाकर सबको पीसकर जल में मिलाकर सुबह-शाम पीने से पाचन क्रिया प्रबल होने से अजीर्ण की विकृति नष्ट होती है.

11. नीबू का रस –

200 ग्राम नीबू के रस मे 100 ग्राम शक्कर मिलाकर, शीशे के पात्र में 20 दिन तक धूप मे रखे. उसके बाद 3 ग्राम मात्रा भोजन से पहले चाटने से अरुचि नष्ट होने के साथ पाचन-शक्ति प्रबल होती है.

12. हिंग और जीरा –

हिंग और जीरा 10-10 ग्राम मात्रा में भूनकर, सोंठ और सेंधा नमक 10-10 ग्राम मिलाकर सबको कून्ट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखे. तीन ग्राम मात्रा मे भोजन के बाद इस चूर्ण को जल के साथ सेवन करें.

13. धनिए और सोंठ –

धनिए और सोंठ को 20-20 ग्राम मात्रा मे कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं. 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ सेवन करें.

14.पीपर का चूर्ण –

पीपर का चूर्ण 2 ग्राम मात्रा में मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें.

15. नाशपाती –

नाशपाती के 20 ग्राम रस मे पीपल का चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर सेवन केरे.

16. तुलसी –

तुलसी के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करें.

17. अमरूद – 

अमरूद के कोमल पत्तों के 10 ग्राम रस मे थोडी-सी शक्कर 5 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से अजीर्ण रोग नष्ट होता है.

18. गाजर का रस –

गाजर का रस 200 ग्राम मात्रा मे प्रतिदिन थोडा सा सेधा नमक व सोंठ का चूर्ण या काली मिर्च का चूर्ण 2 ग्राम डालकर पीएं.

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